हां मेरा मन भी गरियाने को कर रहा है....पर गरियाउँ किसे ? इन दिनो तो ब्लॉग जगत में फ़िर थोड़ी हलचल सी मची है...ब्लॉग जगत की साहित्य मंडली में बह्स छिड़ी हुई है,पर हम गाने बजाने वालों को इससे क्या ? इस पचड़े में जिन्हें पड़ना है पड़े...........ऐसी स्थिति में हम शुरू से वो वाले रहे हैं,लड़ाई झगड़ा माफ़ करो, कुते की लेंड़ी साफ़ करो......तो अब आप भी इसी उम्मीद में इधर आए होंगे कि गरियाने की बात कर रहा है ज़रूर किसी के समर्थन में बात कर रहा होगा चलो देखा जाय आज ठुमरी पर क्या है.?.तो मेरे मित्रों आज आपको मायूस भी नहीं करना चाहता ,मै तो बीच बीच में कुछ मनबहलाव के लिये कुछ गीत ग़ज़ल सुनवाने के मूड में ही रहता हूँ,
आज बहुत दिनों बाद उस्ताद राशिद खान साहब की पकी हुई आवाज़ में राग अहिर भैरव में एक रचना लेकर आया हूँ , इसे सुने....और बताएं कि चकल्लस, जो ब्लॉग जगत में मची हुई है इससे इतर ये रचना सुनकर आपके मन को सुकून पहूँचा की नहीं?
अलबेला साजन आयो रे........
Saturday, 24 May, 2008
मेरा मन भी गरियाने को कर रहा है....पर गरियाउँ किसे ?
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Labels: उस्ताद राशिद खान
Friday, 16 May, 2008
रात भी है कुछ भीगी भीगी....
एक फ़िल्म मुझे जीने दो आई थी,उस फ़िल्म में सुनील दत्त साहब का रोबीला चेहरा और काला लिबास और माथे पर तिलक....घोड़े पर सवार सुनीलदत्त साहब का वो रूप आज भी मुझे याद है,इसी फ़िल्म में वहीदा रहमान ने भी काम किया था,फ़िल्म तो देखे ज़माना हो गया, कुछ भूली बिसरी यादें ही रह गईं हैं....पर गाने इस फ़िल्म के आज तक याद है...साहिर लुधियानवी के लिखे गीतों को संगीत में पिरोया था संगीतकार जयदेव ने...कमाल की धुने थी कि आज भी सुने तो मज़ा आता है...एक गाना था नदी नारे जाओ श्याम पईयाँ पड़ूँ, जिसे लता जी ने गाया था...एक गाना था अब कोई गुलशन न उजड़े अब वतन आज़ाद है जिसे मो. रफ़ी साहब ने गाया था...एक गाना और था तेरे बचपन को जवानी की दुआ देती हूँ.पर इसी फ़िल्म का एक और गीत जो आज मेरे हाथ लगा है वो है रात भी है कुछ भीगी भीगी......तो आज इसे सुना जाय और मज़ा लिया जाय..
सुनील दत्त साहब का वो चेहरा
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Labels: फ़िल्मी
मैं हवा हूँ कहाँ वतन मेरा.....अहमद हुसैन- मोहम्मद हुसैन.....
इस गज़ल को सुनता हूँ तो बहुत सी पुरानी यादों मे खो सा जाता हूँ, अहमद हुसैन मोहम्मद हसैन साहब की जोड़ी कमाल है, गायकी में गज़ब की हारमनी पैदा करते हैं,दोनों की आवाज़ का सुरूर ही कुछ ऐसा है कि इनकी कुछ गज़लों को बार बार सुनने का मन करेगा... आज सुनिये इनकी गायी ग़ज़ल,ये उन ग़ज़लों में शामिल है जिन्हें मैने पहली बार रेडियो पर सुना था....तो पेश है गज़ल मैं हवा हूँ कहाँ वतन मेरा
बच्चों को संगीत की बारीकियाँ बताते एहमद हुसैन-मोहम्मद हुसैन
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Labels: ग़ज़ल
Thursday, 15 May, 2008
चंदन दास की एक गज़ल.....
आज चंदन दास की एक गज़ल सुनिये,वैसे चाहता तो था कि और भी गज़लें जो मुझे पसंद हैं चंदन दास की वो सुनवाता पर आज एक ही ग़ज़ल सुनिये....चंदन दास की आवाज़ दमदार है पर ना जाने क्यौं उनकी गज़लों की फ़ेहरिस्त बहुत छोटी है....कुछ ही गज़लें मुझे पसन्द आयीं थी....जिसमें एक तो खुशबू की तरह आया, वो हवाओं में.. मुझे बहुत पसन्द है, आज भी कभी सुनने को मिल जाता है तो मज़ा आ जाता है। आज उनकी एक ग़ज़ल सुनिये और आनन्द लीजिये....
न जी भर के देखा न कुछ बात की....
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